Thursday, February 18, 2010

संपादकीयझारखण्ड की नियतिझारखण्ड विधानसभा के चुनाव हो चुके हैं और परिणाम तथा सरकार के गठन की परिणति भी आपके सामने हैं। झारखण्ड राज्य बनने के बाद आज तक चुनाव में हारता चला आ रहा है और राज्य गठन के बाद से राजनीतिज्ञ जीतते आ रहे हैं। शिबू सोरेन तीसरी बार मुयमन्त्री बने हैं।पिछले वषोZ के दौरान 6 गठबंधन सत्तासीन हो चुके हैं यह सातवां गठबंधन सामने आया है। राज्य की अस्थिरता के कारण आज भी विकास की स्थिति यथावत है। मसलन हम जहां से सन् 2000 में उठे थे आज भी वहीं पर खड़े हैं। राज्य में जन उपयोगिता कीयोजनाएं जस की तस से भीनीचेके स्तर पर पहुंच चुकी है। अगर यह कहें कि राज्य में बिजली, पानी, स्वास्थ्य , सड़क आदि सुविधाओं का बंटाधार हो गया है तब अतिश्योçक्त नहीं होगी। हां एक मामले में झारखण्ड में कीर्तिमान स्थापित किया है वह है भ्रष्टाचार राज्य में भ्रष्टाचार शीर्ष पर है। राजनीतिज्ञों ने प्रदेश की सपदा से अपने घरों को भरा है प्रशासनिक अमला भी इस कृत्य में पीछे नहीं रहा है। आज कुछएक के सम्बंध में आय से अधिक सपçत्त की बात कहना या फिर भ्रष्टाचार का आरोप लगाना अलग बात है, परन्तु जिनके बारे में भ्रष्टाचार उजागर नहीं हुआ उनकीसंया कम नहीं है। इसपर भी राजनीतिज्ञ का एक ही अलाप कि राजनैतिक कारणों से राजनीतिज्ञों पर इस प्रकारके आरोप लगाए आते हैं। आश्चर्य उस समय होता है जब मधु कोड़ा की पत्नी चुनाव जीत जाती है। इस घटना से एक सन्देश बाहर निकल रहा है कि आदिवासी लूटें तब कोई बात नहीं बाहर के किसी भी व्यçक्त को बदाüस्त नहीं किया जाएगा। इसी तारतय में देखा जाए तब पूर्व मन्त्री एनोस एक्का और हरिनारायण राव जेल में रहते हुए चुनाव जीत गए। निगरानी जांचका सामना करने वाले नलिन सोरेन और बंधुतिकीü भी चुनावजीत गए हैं। इससे राज्य में भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम को क्षति पहुंची है। वहीं पर झारखण्ड की जनता ने भ्0 के लगभग दागी लोगों को चुनकर विधानसभा में पहुंचाया है। जिनमें से झारखण्ड मुक्त मोर्चा से 17 भारतीय जनता पार्टी से 8 तथा अजसुसे 4 सदस्य हैं।कुल मिलाकर खण्डित जनादेश ने झारखण्ड की विकास और नियति पर प्रश्नचिन्ह लगा रखा है। इससे कभी-कभी लगता है कि झारखण्ड का भविष्य क्या होगा? इस प्रदेश के गठन की मूलभूत अवधारणा किस दिन और कैसे मूर्तता प्राप्त करेगी?आज महत्वपूर्ण सवाल यह है कि झारखण्ड में भाजपा-शिबू सोरेन का एक-दूसरे के प्रति विश्वास किस करवट बैठेगा और कब तक बैठेगा शिबू सोरेन का अभी तक का इतिहास चिन्तामय है। चिन्तन को जन्म देता है परिणाम और कोई नहीं झारखण्ड की भोलीभाली जनता को भोगना पड़ेगा। नैतिकता अनैतिकता का बेजोड़ संगम राजनीति है। इस 2009 का गठबंधन झारखण्ड में विकास को नई दिशा दे ताकि हम कह सकें कि अबकी बार भाजपा की संगत ने असर दिखलाया है।

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