Thursday, February 18, 2010

अच्छी पहलभारतीय लोकतन्त्रका
आधारभूत ट्रेक अब पहली बार पकड़ में आता दिखलाई दे रहा है। प्रश्न उठता है कि 1भ् अगस्त 1947 को देश को स्वतन्त्र करवाते समय आम जनता के मन में जो सपना जगाया गया था। उसको कार्यरूप में परिणित करने का आंशिक प्रयास गुजरात की सत्तारूढ़ पार्टी ने प्रारंभ किया है। देश के इतिहास में यह प्रथम अवसर है जब गुजरात विधानसभा ने मताधिकार को अनिवार्यता के दायरे में लाने का विचार बनाया फिलहाल वह राज्य के स्थानीय निकायों को गुजरात स्थानीय प्राधिकार (संशोधन) विधेयक 200भ् राज्य विधान सभा में प्रस्तुत किया जाएगा।अगर यह विधेयक पारित हो जाता है तब निश्चित तौर पर भारतीय लोकतन्त्र में सकारात्मक सुधार दिकाई देने लगेगा और लोकतन्त्र की आदारभूत कल्पना साकार होती दिखाई देने लगेगी। लोकतन्त्र का आधार ही लोकमत के अनुसार देश का संचालन करना है। कुल मिलाकर लोकतन्त्र की भावना के अनुरूप अब भारतीय जनता पार्टी की गुजरात सरकार ने देशवासियों का ध्यान आकर्षित है कि लोकतन्त्र के लिए कौन पार्टी बेईमान स्वार्थी है और कौन-सा राजनैतिक दल ईमानदार सोच रखता है। आज स्थानीय स्वायत्त संस्थाओं में मताधिकार को आवश्यक किये जाने का विधेयक लाया जाएगा तो कल विधानसभा और लोकसभा में भी ऐसा विधेयक लाना ही पड़ेगा जब देश में सभी जगह मताधिकार आवश्यक हो जाएगा उस दिन देश में वास्तविक लोकतन्त्र का राज शुरू होगा।

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