Thursday, February 18, 2010

संपादकीयबढ़ती महंगाई तपनडा. मनमोहन सिंह को भगवान का शुक्र अदा करना चाहिए कि वह भारत के प्रधानमन्त्री हैं कल्पना कीजिए अगर वह अमेरिका के राष्ट्रपति होते और महंगाई को बढ़ाने में मदद करते या यूं कहें कि मनमोहनी अर्थशाीय सिद्धान्त को अमेरिकी जनता पर लागू करते तब परिणाम क्या करतब दिखलाते इसकी डा. मनमोहन सिंह ने कभी कल्पना भी नहीं की होगी। डा. मनमोहन सिंहको स्मरण रखना चाहिए कि वह भारत के प्रधानमन्त्री हैं और भारतीय जनता संस्कारित, सहनशील, राजा (प्रधानमन्त्री) को भगवान मानती हैं। इसलिए अभी तक वह सब कुछ बदाüस्त करती रही है। जनता आशावादी हैं। महंगाई नियन्त्रित होगी ऐसा उसे विश्वास था, परन्तु प्रधानमन्त्री से होकर कृषि मन्त्री ने महंगाई नियन्त्रण के बजाय महंगाई बढ़ाने को क्लीन चटि देतेसमय उपभोगवादी प्रवृçत्त को प्रोत्साहन दिया जिसकी बजह से महंगाई ने तेज रतार अçतयार कर पूंजीपतियों को खुल्ला छोड़ दिया।अर्थशा के सिद्धान्त के तहत मन्दी और महंगाई गाड़ी के दो पहिए होते हैं इनका अपना गूढ़ सिद्धान्त हैं जो सामान्यतज् आम व्यçक्त की समझ से परे हैं। दोनों पहियों की गति देश को विकास पथ पर अग्रसर करती है। मन्दी में सब चीजों के दाम गिरते हैं। तब विकास दर बढ़ती है तब महंगाई घटती क्यों नहीं। चारों तरफ महंगाई से आम आदमी पस्त है। अर्थशा कुछ भी दिखलाए पर राजनीति शा तो यही दर्शा रहा है। महंगाई को बदाüश्त करो चिल्लाओ नहीं सब कुछ बदाüश्त करते रहो इसी विश्वा के रहते भारतीय सरकार निश्चिन्तता से अपनी राजनीति को परवान चढ़ाकर एकके बाद एक राज्य कब्जाती जा रही आत्मविश्वास से सरावोर कांग्रेस पार्टी ने आम आदमी पर महंगाई के चाबूकों की मार पर मार बढ़ाकर दासता के उन काले पन्नों के इतिहास को पीछे छोड़ दिया जिसे याद कर आत्मा सिहर जाती है।भारतीय जनता की सहनशीलता ने जवाब दे दिया उसने हेडली, मुबई हमला, आतंकवाद,लिब्रहान रिपोर्ट रेड अलर्ट, हाई अलर्ट बाबरी मçस्जद 1984 की घटना कोड़ा भ्रष्टाचार ब्रहणेश्र वार्म आदि अनेकों कांग्रेसी परोसो को एक तरफ सरका कर महंगाई के मुद्दे को संसद भवन में खड़ा कर दिया है। अब भारतीय जनता के प्रतिनिधि महंगाई का समाधान सुनना चाहते हैं। सपूर्ण विपक्ष महंगाई का समाधान सुनना चाहते हैं। सपूर्ण निपक्ष महंगाई से त्रस्त जनता का प्रतिनिधित्व करने में संसद भवन में खड़े हो गए हैं, अच्छी बात है चारों तरफ फैले हाराकार ने संसद सदस्यों के कान खड़े कर दिए हैं सरकारी संरक्षण ने भ्रष्टाचारियों जमाखोरों को सुनहरा मौका दिया उन्होंने भरपूर फायदा उठाया परन्तु अब जनप्रतिनिधियों ने अभी तक की पूरी कोर कसर निकालकर सरकार के होश फाते करने की पूरी तैयारी कर ली है। देखना यह है सरकार अब और कौन सा पैन्तरा खेलती है और विपक्ष को और कौनसा मुद्दा परोसती है जो महंगाई से सांसदों को भटका दें। कांग्रेस का इतिहास बताता है कि जब-जब वह सत्ता में आई महंगाई पर चढ़कर ही आई कांग्रेस का आने का मतलब महंगाई की आमन्त्रित करना? इस बार ऊंट किस करवट बैठेगा यह देखने की बात है।

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