Thursday, February 18, 2010

संपादकीयक्या यही सबक काफी नहीं था?ऐसा लगता है कि यूपीए सरकार ने तेलंगाना राज्य की घोषणा करने के बाद उपजी परिस्थितियों से कोई सबक नहीं लिया। अगर सरकार ने सबक लिया होता तब वह जमू कश्मीर की स्वायत्तता का राग अलापना शुरू नहीं करती। जमू कश्मीर की स्थिति के सम्बंध विचारणी कई ऐसे बिन्दु है जो बहुत ही संवेदनशील कहे जा सकते हैं। आज जमू-कश्मीर की विशेष स्थिति कोलेकर गठित प्रधानमन्त्री को सौंप दी है। कार्यदल के सदस्य ही जमू कश्मीर को स्वायत्तता देने की शरमाते करने वाली रिपोर्ट को नामंजूर कर चुके हैं तथा इस सम्बंध में उनका कहना है कि पिछले 28 महीनों से कार्यदल की कोई बैठक नहीं आयोजित की गई है इसके बाद भी अचानक जस्टिस सगीर अहमद ने रिपोर्ट को जारी कर दिया। कार्यदल के सदस्य भाजपा के अरुण जेटली और माकपा नेता यूसुफ ने इस रिपोर्ट को धोखा बताया है। अगर हम यह कहें कि कश्मीर को स्वायत्तता के सवाल पर राजनीति में गर्माहट आ गई है तब अतिश्योçक्त नहीं होगी, तेलंगाना की तरह जमू में भारतीय जनता पार्टी रिपोर्ट के खिलाफ सड़कों पर उतरकर मोर्चा खोल सकती हैं और आधारभूत मुद्दा कार्यदल की रिपोर्ट को बनाया जा सकता है। इससे बची-खुची कांग्रेस गम्भीरतम स्थिति में न पहुंच पाए। कांग्रेस में तेलंगाना के प्रश्न पर पहले से झुलसी हुई है। कांग्रेस पार्टी के लिए कार्यदल की रिपोर्ट एक बड़ा संकट को लेकर आई है।कार्यदल रिपोर्ट में जमू कश्मीर में लागू धारा 370 को वर्तमान स्वरूप में कब तक जारी रखा जाए इस बात परविचारकरने की बात कही गई है। यह सिफारिश भारतीय जनता पार्टी की पुरानी मांग को स्वीकारती है इसी मांग को लेकर डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने अपने सर्वस्व न्यौछावर कर दिया था। वहीं पर कांग्रेस की धारा 370 को संविधान का अभिन्न हिस्सा मांग कर चल रही है और इसकेरहते स्वायत्तता देने की पक्षधर है। स्वतन्त्रता के पश्चात से केन्द्र सरकार ने जमू-कश्मीर को प्रयोगशाला के रूप में संरक्षित किया है। जमू कश्मीर की भौगोलिक स्थिति का भी उन्होंने कभी ध्यान नहीं रखा पं. जवाहरलाल नेहरू से लेकर राजीव गांधी के कार्यकाल तक जमू कश्मीर के साथ क्या हश्र किया उससे सभी लोग वाकिफ है। फिर भी कांग्रेस स्वायत्तता की आग से जमू कश्मीर को क्यों झुलसाना चाहते हैं और वह भी इस समय। क्या कांग्रेस को इस समय का ज्ञान नहीं है कि भाजपा जमू कश्मीर को तीन भागों में बांटने का प्रस्ताव उछाल सकती है। वहीं पर विहिप चार भागों मेंं बांटने की बात पर अड़ जायेगा।आज प्रश्न यह उठता है जमू कश्मीर को स्वायत्तता के मुद्दे को बाहर आते ही अन्य राज्यों द्वारा इस मांग का समर्थन नहीं किया जाएगा। कहने का मतलब यह है कि इस मांग को लेकर फिर तोड़फोड़ की राजनीतिक विसात बिछ नहीं जाएगी। इससमय अच्छा यही होगा कि कांग्रेस स्वायत्तता की किसी भी सिफारिशी रिपोर्ट पर बात न करते हुए उसे ठण्डे बस्ते के हवाले करके तेलंगाना में लगी आग को ठण्डा करने में अपनी ताकत लगाए।

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