Thursday, February 18, 2010

संपादकीय...गरीब के बनेगी शराबमहात्मा गांधी ने सच ही कहा था कि हमारी धरती मां के पास इतना तो है कि वह अपने आçश्रतों को पेट भरकर भोजन दे सकती है परन्तु देश के एक लालची व्यçक्त की इच्छापूर्ति नहीं कर सकती है। क्योंकि लालची व्यçक्त को कभी-भी कोई भी सन्तुष्ट नहीं कर सकता। भारत मां परिश्रमी को सुबह भूखा उठाती है पर रात को कुछ न कुछ खिलाकर ही सुलाती है। ऐसी कृपालु धरती मां के कलयुगी सपूतों ने निजी हितों को संरक्षित रखने के लिए क्या-क्या करतब किए हैं उनकी फेहरिस्त काफी लबी है। अभी हाल में ही गरीबी का आकलन करने वाली सुरेश तेन्दुलकर समिति की रिपोर्ट में बताया गया है कि देश के 6 राज्य गरीबी से त्रस्त हैं उनमें महाराष्ट्र राज्य भी है उसी गरीब राज्य की सरकार जो अपने प्रदेशवासियों को रोटी नहीं दे सकती कर्ज माफ नहीं कर सकती, अपने सपूतों को आत्महत्याएं करने से रोक नहीं सकतीं, वही सरकार गरीबों के मोटे अनाज से शराब बनाने की इजाजत देकर उन गरीबों को भूखों मरने के लिए मजबूर कर रही है। महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में रहने वाले किसानों की स्थिति का उसे याल नहीं आता जहां भूख से छुटकारा पाने के लिए आत्महत्या कर रहे हैं।महाराष्ट्र सरकार भूखों को अन्न की व्यवस्था तो कर नहीं पाई उल्टे मोटे अनाज से ज्यादा से ज्यादा लोगों को शराब उपलब्ध करवाने के लिए उद्योगपतियों को लाइसेंस दे रही है। उसने 40 करोड़ के पूंजी निवेश की उमीद के साथ राज्य में 23 शराब कारखानों को 60 हजार लीटर से लेकर सवा लाख लीटर प्रतिदिन शराब बनाने की अनुमति देकर प्रदेश के उन उद्योगपतियों को 10 रुपए प्रति लीटर सçब्सडी भी देने का निर्णय लिया जो कम कीमत पर छोटी थैलियों में शराब बेचने की सुविधा गली-कूचों में उपलब्ध कराएगी। महाराष्ट्र सरकार की सोच के सम्बंध में यह बानगी ही होगी कि महाराष्ट्र का किसान ज्वार, बाजरा और मक्का ही पैदावार के लिए इससे प्रोत्साहित होगा। इन फसलों से अभी तक वह सोयाबीन उगाता आ रहा है। किसान की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। महाराष्ट्र में पहले से ही शराब उत्पादन के क्षेत्र में 2भ् कारखाने चल रहे हैं। 18 नई भटि्टयों को स्थापित करने की इजाजत अभी और दी गई है। ज्ञात हो कि महाराष्ट्र में शराब की ज्यादातर भटि्टयां कांग्रेस भाजपा और एनसीपी नेताओं की ही है। जिनमें पूर्व प्रधानमन्त्री नरसिहाराव पूर्व मुयमन्त्री बिलासराव देशमुख भाजपा नेता गोपीनाथ मुण्डे महाराष्ट्र के आबकारी मन्त्री गणेश नाइक के परिवारजन रिश्तेदार आदि द्वारा संचालित है। महाराष्ट्र में सबसे अधिक शराब अंगूर से बनाई जाती रही है मगर जिस तेजी से नई-नई भटि्टयों को खोला जा रहा है उससे अंगूर की उपलब्धता में कमी आ रही है। महाराष्ट्र में अंगूर सुखाकर किसमिस बनाने का भी बड़ा कारोबार होता है। इसलिए महाराष्ट्र सरकार ने मोटे अनाजों से शराब बनाने के लाइसेंस जारी किये हैं।महाराष्ट्र में गरीबी का जहां तक सवाल है यहां पर देशभर से लोगों का आना जाना लगा रहता है। महाराष्ट्र में देशभर के मजदूर भारी संया में रोटी कमाने के लिए जाते हैं। परन्तु महंगाई की मार से त्रस्त दो जून की रोटी कमाने के लिए उन्हें लाले पड़ रहे हैं। ऐसे में गरीब जैसे-तैसे मोटा अनाज खाकर अपना गुजर बसर कर लेता है। परन्तु अब स्थिति यह आ रही है कि शराब लॉबी के खाद में मोटे अनाज को भी शराब बनाने के काम में लेकर मोटा अनाज से गरीब से मेहरूम किया जा रहा है।महाराष्ट्र सरकार पर शक्कर लॉबी किस प्रकार से हाबी है। उसी प्रकार से शराब लॉबी भी कम नहीं है। देश में शक्कर के भाव तीन गुने बढ़ गए हैं इसी प्रकार से आने वाले समय में मोटे अनाजों के भाव आसमान पर पहुंच जाने की पूरी संभावना दिखाई दे रही है।शिवसेना सहित अन्य राजनैतिक दल शराब के लाइसेंस दिये जाने, मोटे अनाज से शराब बनाने शराब पर सçब्सडी देने का विरोध नहीं कर रहे हैं, क्योंकि अधिकांश पार्टी के लोग इन गोरख धंधों में स्वयं को फंसाए हुए हैं। उन सभी के हित संरक्षित हो रहे हैं। गरीब जनता का ध्यान भटकाने के लिए महाराष्ट्रवाद, भाषावाद के शगूफे छोड़ते रहते हैं। वास्तविकता यह है कि राजनीति में सभी पाटिüयां अपने-अपने हितों को संरक्षित करने में चौकस हैं। उन्होंने तो गरीबों को निबाले भी खाने को नहीं छोड़े।

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