Thursday, February 18, 2010
संपादकीयतौलनी होंगी तैयारियांभारत की राजधानी नई दिल्ली में आगामी वर्ष में राष्ट्रमण्डल खेलों का महाआयोजन होने जा रहा है। हम इस खेल महाकुंभ की मेजबानी करने जा रहे हैं, इसके लिए राजधानी को सजाया जा रहा है संवारा जा रहा है, ताकि विश्व की नज़रों में हमारी अतिथि देवो भव की परपरा अपने सही, स्वरूप में आ सके।यह अलग बात है कि फिलहाल बहुत-सी बातें उठ रही हैं, एक तरफ कहा जा रहा है कि तैयारियों में तेजी की कमी है, यही वजह है कि लगता कि तैयारियां समय पर पूरी हो सकेंगी अथवा नहीं। उधर आयोजन पक्ष का दावा है कि कहीं दूर-दूर तक दिक्कत नहीं है, तैयारियां ठीक चल रही हैं। सब कुछ समय पर हो जाएगा।उधर भारत को वल्र्डकप 2011 के कुछ क्रिकेट मैचों की मेजबानी का मौका भी सामने है। विश्व स्तरीय खेल आयोजनों की मेजबानी का अवसर कितना महत्वपूर्ण होता है यह सर्वविदित है। पर इन सब स्वणिüम संभावनाओं के चलते यदि कुछ ऐसा घट जो जो अप्रिय हो तो संभावनाओं पर साया सा पड़ता दिखने लगता है। कोटला की पिच का श्रीलंका की टीम द्वारा नकार दिया जाना अपने आपमें एक महत्वपूर्ण घटना है गौरतलब है कि यह पिच उसी दिल्ली में है जहां पर खेल महाकुंभ होना है। हालांकि इन दोनों बातों का आपस में सीधा सम्बंध नहीं है, परन्तु क्या इस तरह से अन्तर्राष्ट्रीय पिच का गुणवत्ता से कमतर होना कोई बेहतर संकेत है। पिच के कारण मैच का रद्द हो जाना तीन साल तक के प्रतिबंध का कारण भी बन सकता है। तब इसका 2011 में होने वाले विश्वकप मैचों की मेजबानी पर क्या असर पड़ेगा कल्पना की जा सकती है क्योंकि यहां ग्रुप स्टेज के चार मैच 2011 में होना प्रस्तावित है। अब यह विषय जांच का तो है ही कि आखिर पिच कैसे खराब हो गई, उसकी तैयारी में कहां पर कौन-सी कमजोरी रह गई कि नतीजा यूं सामने ाया। इस मामले में या तो डीडीसीए को मात्र चेतावनी देकर छोड़ा जा सकता है अथवा उस पर जुर्माना भी लग सकता है। इन सबके अतिरिक्त जो अधिकतम दण्ड दिया जा सकता है वह यह कि सेंटर पर तीन वर्ष के लिए प्रतिबंध लग जाए, नतीजा 2011 में मेजबानी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।अब यहां पर चिन्तन का विषय यह है कि आखिर वे क्या परिस्थितियां और कारण है कि जिनके चलते इतनी लापरवाही हो गई कि पिच मैच पूरा होने से पहले ही जवाब दे गई और बॉलर्स द्वारा फेंकी गई बाल्स खतरनाक तरीके से उछलीं, जिससे बल्लेबाज खासे परेशान हो गए। यह तो शुक्र है कि इन उछलती गेन्दों की चपेट में कोई खिलाड़ी नहीं आया अन्यथा तो मामला और गम्भीर हो जाता। हालांकि मैच इस पिच पर 23.भ् ओवर तक चला परन्तु आज जब हमारे यहां खेलों का महाकुंभ होने जा रहा है, 2011 में हमें वल्र्डकप मैचों की मेजबानी करनी है तो क्या यह खामी सामान्य कही जा सकती है।खिलाçड़यों की हमारे यहां क्या हालत है वह समय-समय पर सुर्खियां बयां कर देती है कि फलां चैçपयन ाज यूं अपना भरण पोषण कर रहा है, क्योंकि उसकी कोई पूछ परख करने वाला है ही नहीं। अब कल्पना करें कि यदि इस तरह की लापरवाही या गड़बड़ी फिर हुई तो हमारी छवि कैसी बनेी? क्रिकेट प्रेमी तो इस घटना से खासे निराश हुए ही हैं, खेल जगत ने भी इसके क्या मायने लगाए। होंगे अनुमान लगाया जा सकता है पर जब विश्व स्तरीय आयोजन होंगे और तब कुछ होता है तो परिणामों पर विचार होना जरूरी है। अतज् आज आवश्यकता इस बात की तो है ही कि यह जो कुछ भी हुआ उस पर सही, सटीक कठोर कार्रवाई हो, साथ ही साथ इस तरह की घटनाओं की पुनरावृçत्त न हो इसके लिए हमें हर स्तर पर अपनी तैयारियों को तौलना होगा।
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