Thursday, February 18, 2010

संपादकीयकिसी भी देश की तरक्की ही नहीं बल्कि उस देश के नागरिक और उनका समाज भी तभी प्रगति के रास्ते पर आगे बढ़कर नई ऊंचाइयां छू सकता है जहां पर लोकतन्त्र की बयार बहती हो। इस मामले में भारत के सभी नागरिक खुशकिस्मत हैं कि यहां पर कभी-भी किसी-भी व्यçक्त ने देश को अपनी मर्जी से चलाने की कोशिश नहीं की बल्कि उन्होंने देश को जनता के मतानुसार ही चलाया है और संसद भवन से लेकर विधानसभा तथा स्थानीय सरकार (नगर पालिक निगम) तक का गठन जनता के मतों पर ही आज तक निर्भर रहा है। आज मध्यप्रदेश के ग्वालियर शहर में भी नई स्थानीय सरकार के गठन हेतु गत दिनों हुए मतदान की गणना (आपके हाथों में जब अखबार होगा तो परिणाम भी सामने आ चुके होंगे) चल रही है । इसके परिणाम के बाद स्थानीय सरकार की गठन की कवायद भी शुरू होगी और हर दल यह प्रयास करेगा कि स्थानीय सरकार उनकी ही बने या फिर गठित होने वाली सरकार उनका सहयोग ले, उनके सहयोग के बिना कोई सरकार अपने अस्तित्व में न आ पाए। यह तो एक तस्वीर है लोकतन्त्र के एक पहलू की। लोकतन्त्र यह भी कहता है कि हमें संविधान में प्रदत्त सारी सुविधाएं और अधिकार मिलें। इसके प्रयास होते रहे हैं, लेकिन ग्वालियर में लोकतन्त्र के लिए लोकतन्त्र का ही उपहास उड़ाया गया। यह उसकी सेहत के लिए अच्छा नहीं कहा जा सकता है। उपहास इस मायने में कि हमें मतगणना के लिए सुरक्षा के चलते ऐसे उपाय और ऐसे स्थान का चयन करना पड़ा जहां पर मत देने वालों को भारी तकलीफों का सामना करना पड़ा। स्थानीय यातायात का साधन टूसीटर जिसका क्रमांक एमपी 07टी 1613 में सवार एक पेसेंट को सिर्फ इसलिए उस रास्ते का इस्तेमाल नहीं करने दिया गया कि आगे मतगणना का कार्य लोकतान्त्रिक प्रक्रिया के लिए चल रहा था। इस मामले में महारानी लक्ष्मीबाई कॉलेज

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