22 दिसम्बर, मंगलवार,09संपादकीय-1समझना होगा कार्यकर्ता का ददüभारतीय जनता पार्टी के इतिहास में 18-19 दिसम्बर 200भ् का दिन महत्वपूर्ण दिन होगा, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी ने भी कांग्रेस पार्टी की तरह संसदीय दल के अध्य7 का पद निर्मित कर लिया है और लोकसभा में विपक्ष के नेता से त्यागपत्र देने वाले लालकृष्ण को उस पर सुशोभित कर सम्भवतज् तुष्टीकरण की नीति अपनाई है।इस व्यवस्था से सांसद आडवाणी के कद में इजाफा हुआ है या पिर गिरावट आई है यह अलग बात है, परन्तु भारतीय जनता पार्टी के संविधान में संशोधन कर बनाए गए नये पद पर विराजे व्यçक्त कोसंसद एवं राज्यसभा के दल नेता नियुक्त करने तक का अधिकार मिलता निश्चित रूपसे बढ़े हुएकद को दर्शाता है।नये संसदीय दल के अध्यक्ष पद का निर्माण संघ की विचारधारा से मेल खाता है या नहीं यह अलग बात है पर इतना तो निश्चित ही कहा जा सकता है कि इस व्यवस्था से भारतीय जनता पार्टी का समग्र आन्तरिक सुधार सम्भव नहीं है।भाजपा भयावह संकटों और अन्तर्कलह से घिरी पार्टी में यदि नेतृत्व अपने को प्रमुखता दे तब कैसे माने कि भारतीय जनता पार्टी के अखिल भारतीय नये अध्यक्ष नितिन गडकरी ऐसा कुछ कर पाएंगे जो भारतीय राजनीति को नई दिशा देखने में कामयाब हो सके। संगठन का कायाकल्प समर्पण से होता है। भाजपा तो संस्कारित पार्टी हैं। मां,पिता, गुरु, पति-पत्नी, लड़का-लड़की आदि के समर्पण ही परिवार की एकता की शçक्त को अनुभव कराते हैं। पिछले लगभग भ् माह से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी के मन्थन के जो परिणाम सामने आ रहे हैं वह भारतीय जनता पार्टी के वास्तविक संकटों का निदान नहीं कर पाएंगे। जब तक भाजपा नये सिरे से आम जनता में यह सन्देश नहीं बिखेरती कि भारतीय जनता पार्ट नेताओं की पार्टी नहीं है आम जनता के दुख ददü को मुखरित करके निदान करने वाली पार्टी है। नितिन गडडकरी पहले दिन से ही आम आदमी में पार्टी के प्रति विश्वास त्याग और समर्पण का जनजागरण कर पार्टी के प्रति विश्वास त्याग और समर्पण का जन जागरण कर पार्टी को पूर्ववत खड़ा करने को प्राथमिकता दे न कि पुराने लोगों से आशीर्वाद लेने में लगे रहे।भारतीय जनता पार्टी के नये अ.भा. अध्यक्ष गडकरी की आस्था आम कार्यकर्ता और पार्टी की नीतियों में होनी चाहिए न कि नेताओं की तुष्टीकरण में। राज्यसभा लोकसभा पर गडडकरी का कितना प्रभाव रहेगा। ऐसा प्रश्न है जिसका जवाब आम कार्यकर्ता जानना चाहता है कोई भी व्यçक्त हो पार्टी से बड़ा नहीं हो सकता। जहां नेता बड़ा होने की बात सोचता है वहीं पर पार्टी का मार्ग गर्त की ओर मुड़ने लग जाता है। इस पर विचार किया जाना चाहिए। गडकरी की सोच में पुराने समर्पित लोगों को साथ रखने का जो विचार आया है वह सकारात्मक है।
संपादकीय-2महंगाई ने उलझन बढ़ाईशीतकालीन अधिवेशन में संप्रग के निति निर्धारक नेता अपनी रणनीति में सफल ही नहीं रहे बल्कि भारतीय जनता के सामने विपक्ष की नकारता को ढोल धमाके के साथ उजागर कर दिया। सांसद तो मात्र सुविधाओं को भूखे हैं जनता की परेशानियां उन तक पहुंच ही नहीं पाती। विपक्ष को महंगाई का मुद्दा सबसे उपयुक्त लगता है। इस पर बहस भी होती है पर निर्णय कुछ भी हाथ नहीं आता। सरकार की निçष्क्रयता के कारण आवश्यक वस्तुओं के भाव अक्टूबर के मुकाबले तीन गुना बढ़ गये हैं। वित्तमन्त्री महंगाई बढ़ने से चिन्ता व्यक्त करने की रस्म अदायगी कर रहे हैं। खाद्य पदाथोZ की महंगाई दर नवबर के अन्तिम सप्ताह में 19.04 प्रतिशत भी पिछले 8 माह में आलू 141 प्रतिशत चीनी 37 प्रतिशत दालें, 32 प्रतिशत प्याज, 20 प्रतिशत बढ़े हैं। प्रधानमत्री की आर्थिक सलाह परिषद के अध्यक्ष सुरेश तेन्दुलकर ने कहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक महंगाई पर काबू पाने के लिए नकदी खींच सकता है तथा अगले महीने क्रेडिट पॉलिसी पुनरीक्षित की जा सकती है। थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर नवबर में सबसे ज्यादा 7.78 फीसदी हो गई। पिछले साल इसी महीने में 1.34 प्रतिशत थी। वित्तमन्त्री प्रणब मुखर्जी और वाणिज्यमन्त्री आनन्द शर्मा भी महंगाई बढ़ोत्तरी से चिन्तित हैं। अर्थशाी इन्द्रनील पान का कहना है कि खाद्य और कामोडिटी के दाम बढ़ने का सीदा असर जनता पर पड़ रहा है उनका कहना है कि अगले वर्ष मार्च तक थोक मूल्य सूंचकांक आधारित महंगाई पर 8-7 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। केन्द्रीय बैंकको सिस्टम में मौजूदा ज्यादा नकदी को कम करने के लिए कदम उठाने होंगे। रिजर्व बैंक जनवरी में कैश रिजर्व राशियों में 2भ्-भ्0 बेसिस पाइंट की कमी कर महंगाई के खिलाफ कदम उठा सकता है। इस समय खाद्य पदाथोZ की महंगाई आसमान छू रही है। थोक मूल्य सूचकांक में इसका वेटेज 14.4 प्रतिशत है। कुल मिलाकर केन्द्र सरकार महंगाई को नियन्त्रित करने में स्वयं को असक्षम मान रही है। वह राज्यों से अपेक्षा कर रही है कि वह कारगर कार्यवाही करें।
Thursday, February 18, 2010
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